फ्री का नशा
हम भारतीयों को फ्री में मिली हर चीज पसन्द है,हम उसके मुरीद हो जाते है जो हमको ये फ्री सुविधाएं देता है, अंग्रेज हमे ये आदते दे गए फिर कांग्रेस सरकारों ने इसे बरकरार रखा आगे की सरकारों ने उसे बन्द नही किया जो सरकार ज्यादा से ज्यादा फ्री दे हम उसको रिश्वत में वोट देंगे।
कांग्रेस ने 70 साल गरीबी हटाओ का नारा दिया और 1950 से 1975 तक गरीबो के कल्याण के नाम से नेताओं की गरीबी दूर की फिर 20 सूत्रीय कार्यक्रम पेश किया जिनमे फिर जाति और गरीबों के नाम पर करोड़ो अरबो रुपये का हेरफेर हुआ और देश के बहुसंख्यक हिंदुओं को जातियों में बाट कर उन्हें आरक्षण का लालच दे कर पंगु कर दिया फिर सरकारे आती गयी जाती गयी आरक्षण एक आवश्यक चुनाव सामग्री हो गया पार्टीयां ने आरक्षण को वोट कबाड़ने की फैक्ट्री बना लिया। राजनीतिज्ञों को मालूम पड़ गया कि अब फ्री का जीवाणु भारतीय वोटरों के लहू में घुल गया है फ्री में इनको जहर दो तो ये जहर भी ले लेलेंगे।
फिर कही समाजवादियों ने लैपटॉप बाटे तो कहीं दूसरे दल ने साइकिल, स्कूटी, से लेकर तो मोबाइल तक फ्री बाटे जनता को दिखाने के लिए छात्रों का छात्राओं का उत्साहवर्धन पर दरअसल वोट फैक्ट्री लगाने का काम टैक्सपेयर्स टैक्स दे और सरकारे कल्याण के नाम से वोट फैक्ट्री खड़ी करे, जिनमे बिजली फ्री,बसयात्रा फ्री, राशन फ्री, गेस फ्री घर फ्री और जनता ने क्या किया तो सब फ्री में लेकर उसका भरपूर दुरुपयोग किया बिजली फ्री या एक बत्ती कनेक्शन के नाम पे घर मे उद्योग लगा लिए।
घर फ्री में लेकर किराए पर चढ़ा दिया।
और बदले में वोट देदिया बिना ये सोचे कि ये हमारा ही शोषण करने हमे फ्री की आदत डाल रहे है।
अब केजरीवाल जी का उदाहरण लेलो आये थे भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पे जम कर खुद किया 4.5 साल चिल्लाते रहे कि मोदी हमको काम नही करने दे रहे पर पिछले 6 महीनों में मोदी ने सब काम के लिए इनको छूट देदी पानी फ्री,बिजली फ्री, बस यात्रा फ्री , अमका फ्री ढिमका फ्री और दिल्ली की जनता खुश वोट पक्के केजरीवाल के बोलबाले।
जब तक फ्री जीवाणु हमारे खून में है हम यू ही ठगाते रहेंगे कभी कांग्रेस कभी समाजवादी कभी बसपा कभी बीजेपी कभी कोई नई पार्टी। तो आइए फ्री में क्याक्या मिलता है ले कर लम्बी चादर तान के सोये।
जयहिंद